वर्धमान से प्रभु महावीर ...
जैसे हाथियों में ऐरावत, पशुओं में सिंह,
नदियों में गंगा, पक्षियों में गरुड़ श्रेष्ठ है,
वैसे ही निर्वाणवादियो में महावीर श्रेष्ठ है |
जैन धर्म के २४ वे तीर्थंकर भगवान महावीर एक ऐसे महापुरुष हुए है जिनका जीवन अलौकिक है, असाधारण है, अविस्मरणीय है और अनुकरणीय भी। वे सिर्फ जैन धर्म में ही नहीं अपितु मानव धर्म और वैश्विक जन धर्म में भी उतने ही पूजनीय और वंदनीय है | वे जन धर्म के प्रणेता है |
वे जन्म से वर्धमान थे, पुरुषार्थ और कर्म से महावीर कहलाये | अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह को पूर्णतया अपने जीवन में उतार कर महावीर 'जिन' कहलाए | भगवन महावीर ने जीव मात्र के कल्याण के लिए कई सूत्र दिए है जिनका अनुसरण कर हम भी अपना जीवन सफल बना सकते है |
आप सब के समक्ष कुछ बिंदुओं को आधुनिक युग की आवश्यकता अनुसार प्रस्तुत कर रहा हु जिसे अपनाकर हम अपना जीवन परिवर्तन और लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन कर सकते है :
१. समया धम्म मुदाहरे मुनि : समता धर्म बताया मुनि ने | भगवान कहते है - हमे सभी स्तिथियो में सम रहने का प्रयास करना चाहिए | यह सूत्र 'Nothing is Permanent - यह समय भी नहीं रहेगा' की थ्योरी को पुष्ट करता है|
वर्तमान सन्दर्भ में हम देख रहे है, कुछ समय पहले कोरोना नाम का शब्द हम जानते भी नहीं थे, परन्तु आज उसकी त्रासदी से हम सब पीड़ित है और कुछ समय बाद जब यह चला जाएगा तब हम सब पुनः हमारी दैनिक दिनचर्या में ढल जाएगे | परन्तु इस बिच के समय को हमे जीना है तो हमें महावीर के पदचिन्हो पर चलना होगा, सम भाव से जीना ही एक मात्र उपाय है | शुभ भविष्य पे विश्वास और धैर्य ही हमारी सबसे बड़ी ताकत रहेगी |
२. काले कालं समायरे : काम ठीक समय पे करो | हमारी आधी समस्याओ का समाधान इसी सूत्र में छिपा हुआ है | 'First Work First' यह सफलता का मंत्र हम सभी जानते है | प्रकृति ने हम सब के लिए एक टाइम टेबल निश्चित किया है - भोजन का, विश्राम का, देव दर्शन का ,व्यापार का , इत्यादि अगर हम ये सभी सही काम को सही समय पर करेंगे तो जीवन से तनाव स्वयं विसर्जित हो जाएगा | यहाँ पर सही समय पर सही कार्य करने की प्रायोरिटी बताई गयी है |
३. विवेगे धम्ममाहिए : विवेक ही धर्म है | यहाँ विवेक का तात्पर्य ज्ञान, आत्म संयम और अनुशासन से है |जो व्यक्ति स्वयं विवेक में रहता है वही धर्म का अनुसरण कर सकता है | हमने महापुरुषों से सीखा है की “Discipline is the bridge between goals and accomplishment” और ये ही विवेक का मर्म है | भोजन एवं वाणी का विवेक, संयम और अनुशासन ही सफलता के सबसे महत्त्वपूर्ण सूत्र है |
अनुशाशन और विवेक का अपमान करने वाले जो पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और वनस्पति के अस्तित्व की उपेक्षा या अवहेलना करता है, वह अपने स्वयं के अस्तित्व की अवहेलना करता है जो उनके साथ जुड़ा हुआ है।
आइये हम सब इस महावीर जन्मकल्याणक के शुभ अवसर पर उनके सिद्धांतो को जीवन में लाने का प्रयास कर उनके प्रति श्रद्धा भाव समर्पित करें |
आगम असम्मत कुछ लिखने में आया हो तो तस्स मिच्छामि दुक्कडम |

Very nice
ReplyDeleteThank you so much sir for your feedback!
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